
प्रस्तुत कहानी संग्रह में कहानीकार की समस्त 14 कहानियां मानव जीवन का दर्पण है। इन के सभी पात्र हमारे आस-पड़ोस के हैं। गली-बाज़ारों में घूमते, जीवन-संघर्ष में रत, कभी हारते-कभी जीतते दिखाई पड़ते हैं।
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ISBN :
9789391854065
Published :
2023
Pages :
xiv+90
Size :
6*9
Binding :
Paperback
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प्रस्तुत कहानी संग्रह में कहानीकार की समस्त 14 कहानियां मानव जीवन का दर्पण है। इन के सभी पात्र हमारे आस-पड़ोस के हैं। गली-बाज़ारों में घूमते, जीवन-संघर्ष में रत, कभी हारते-कभी जीतते दिखाई पड़ते हैं। विभिन्न स्थितियों, परिस्थितियों, अनुभूतियों और अनुभव से परिपूर्ण इन कहानियों के नायक और नायिकाओं में यही विलक्षणता है कि वे सामान्य होते हुए भी एक दूसरे से अलग जरूर हैं।
कुछ घटनाएं साधारण होती हैं और वे अपने पीछे असाधारण होने की संभावना को संजोये रखती हैं। ऐसी घटनाओं से ही इन कहानियों का ताना-बाना बुना गया है। ऐसी कहानियों के कलेवर को उद्घाटित करने के लिए स्थिति, स्थान और पात्रोनुकूल सरल-स्पष्ट भाषा का प्रयोग किया गया है।
हिंदी के प्रसिद्ध गल्पकार, श्री शैलेन्द्र शैल के अनुसार, “ये कहानियां पंजाब की जमीन से जुड़ी हुई हैं जिन में वहां की मिट्टी की सोंधी गंध बसी है। ये मानवीय भावनाओं और संबंधों की कहानियां हैं और हमारे समाज के सरोकारों का चित्रण हैं। ये कहानियां हमारे मन को छू जाती हैं”।
प्रेम भूषण गोयल पिछले 60 वर्षों से साहित्य साधना रत हैं। उन्होंने अब तक 24 पुस्तकें लिखी हैं। उनकी पहली पुस्तक ‘साडे राखे वीर सिपाही’ की प्रशंसा भारत के राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन अपने हस्ताक्षरों से लिखे एक पत्र द्वारा की। पुस्तक ‘हाथी: हमारा साथी’ पर उन्हें गुरु हर कृष्ण पुरुस्कार प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने 1984 में राष्ट्रपति भवन में साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। 2006 में लेखक को पंजाब सरकार की ओर से ‘शिरोमणि साहित्यकार’ के सम्मान से विभूषित किया गया।
रूल्दू की कहानियां, मन की बात न जानै कोइ, जलियावालां बाग: कांड एवं कहानियां, मृगतृष्णा (काव्य संग्रह), नवचिंतन (अनुवाद) इत्यादि लेखक की हिंदी में प्रकाशित पुस्तकें हैं। लेखक भाषा विभाग पंजाब से डिप्टी डायरेक्टर में रिटायर हुए हैं।
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