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ISBN :
9789385883798
Published :
2018
Pages :
x+224
Size :
6*9
Binding :
Paperback
DOI :
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प्रेम भूषण गोयल पिछले 60 वर्षों से साहित्य साधना रत हैं। उन्होंने अब तक 24 पुस्तकें लिखी हैं। उनकी पहली पुस्तक ‘साडे राखे वीर सिपाही’ की प्रशंसा भारत के राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन अपने हस्ताक्षरों से लिखे एक पत्र द्वारा की। पुस्तक ‘हाथी: हमारा साथी’ पर उन्हें गुरु हर कृष्ण पुरुस्कार प्राप्त हुआ। राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने 1984 में राष्ट्रपति भवन में साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें सम्मानित किया गया। 2006 में लेखक को पंजाब सरकार की ओर से ‘शिरोमणि साहित्यकार’ के सम्मान से विभूषित किया गया।
रूल्दू की कहानियां, मन की बात न जानै कोइ, जलियावालां बाग: कांड एवं कहानियां, मृगतृष्णा (काव्य संग्रह), नवचिंतन (अनुवाद) इत्यादि लेखक की हिंदी में प्रकाशित पुस्तकें हैं। लेखक भाषा विभाग पंजाब से डिप्टी डायरेक्टर में रिटायर हुए हैं।