
हिन्दू सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, अपितु हजारों वर्षों से प्रवाहित एक अनंत जीवन-दर्शन है— जिसने वेदों के मंत्रों से लेकर महाकाव्यों की अमर कथाओं तक, मानवता को ज्ञान, संस्कृति और सह-अस्तित्व का संदेश दिया है।
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ISBN :
978-93-7575-842-6
Published :
2027
Pages :
x+288
Size :
6*9
Binding :
Paperback
DOI :
10.63764/978-93-7575-842-6
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हिन्दू सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, अपितु हजारों वर्षों से प्रवाहित एक अनंत जीवन-दर्शन है— जिसने वेदों के मंत्रों से लेकर महाकाव्यों की अमर कथाओं तक, मानवता को ज्ञान, संस्कृति और सह-अस्तित्व का संदेश दिया है।
यह पुस्तक हिन्दू सनातन धर्म की जड़ों, उसके दार्शनिक आधार, साहित्यिक धरोहर और ऐतिहासिक यात्रा का एक समग्र एवं विद्वतापूर्ण परिचय प्रस्तुत करती है। वेद, उपनिषद, पुराण, धर्म-दर्शन और महाकाव्यों के साथ-साथ इसमें हिन्दू समाज की संरचना,धार्मिक परंपराएँ, सुधार आंदोलन, उपलब्धियाँ और समकालीन चुनौतियाँ विस्तार से विवेचित हैं।
सरल किन्तु शोधपरक भाषा में रचित यह ग्रंथ सामान्य पाठक से लेकर शोधार्थी तक, सभी के लिए उपयोगी है। यह न केवल हिन्दू धर्म की आध्यात्मिक गहराई को उजागर करता है, बल्कि इसकी जीवन्तता, अनुकूलन क्षमता और विश्वदृष्टि को भी स्पष्ट रूप से सामने लाता है।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है जो हिन्दू धर्म को केवल मान्यता के रूप में नहीं, अपितु एक सनातन, जीवंत और वैश्विक दृष्टिकोण वाले जीवन दर्शन के रूप में समझना चाहते हैं।
डॉ. एस. डी. चमोला ने पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से अर्थशास्त्र में एम. ए. और पीएच. डी. की उपाधि प्राप्त की। उन्हें शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में 40 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में लगभग 150 शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं। उन्होंने 15 पुस्तकें लिखी हैं और 10 पीएच.डी. छात्रों का मार्गदर्शन किया है। उन्होंने हरियाणा सरकार की ओर से विश्व बैंक के सलाहकार के रूप में कार्य किया। इसके अलावा, उन्होंने हरियाणा में संसाधनों से संबंधित इंडो-डच परियोजना में भी सलाहकार के रूप में सेवाएँ दीं। वे समय-समय पर भारत सरकार और हरियाणा सरकार द्वारा गठित कई समितियों और आयोगों के सदस्य भी रहे हैं। वे कई विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे हैं। उन्होंने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से अर्थशास्त्र और व्यवसाय प्रबंधन के प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्ति प्राप्त की। वर्तमान में वे हिसार (हरियाणा) में स्वतंत्र शोधकर्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं।
सुदर्शन गुप्ता हिसार, हरियाणा के निवासी है एवं इस पुस्तक के लेखक एवं अनुवादक हैं। वह हिसार की अनेक सामाजिक संस्थाओं से सम्मानित हैं एवं विभिन्न मंदिरों से जुड़े हुए हैं। वह विभिन्न सामाजिक कार्यों विशेषकर शिक्षा क्षेत्र की विभिन्न गतिविधियों में संलग्न रहते हैं।
भूमिका
प्राक्कथन
अध्याय 1: सनातन हिन्दू धर्म
अध्याय 2: वेद
अध्याय 3: उपनिषद
अध्याय 4: पुराण
अध्याय 5: दर्शन शास्त्र
अध्याय 6: महाकाव्य